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राजभाषा उपलब्धियां
केन्द्र ने पिछले कुछ वर्षों में राजभाषा के क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की है। जो इस प्रकार हैं :
1. हिन्दी में उत्कृष्ट कार्य के लिए केन्द्र को पाँच बार नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) पुरस्कार
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वर्ष 2003-04 |
वर्ष 2004-05 |
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वर्ष 2005-06 |
वर्ष 2006-07 |
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वर्ष 2007-08 |
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2. संसदीय राजभाषा समिति द्वारा निरीक्षण
दिनांक 2 फरवरी, 2006 को केन्द्र में राजभाषा कार्यान्वयन की समीक्षा हेतु संसदीय राजभाषा समिति की तीसरी उपसमिति द्वारा निरीक्षण किया गया। बैठक में केन्द्र में राजभाषा कार्यान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। केन्द्र द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयत्न संतोषप्रद थे।
3. युनिकोड़ प्रशिक्षण : राजभाषा अनुपालन
 
केन्द्र में दिनांक 14 अक्टूबर तथा 2 व 3 नवम्बर, 2011 को राजभाषा अनुपालन के अंतर्गत तीन अर्धदिवसीय युनिकोड़ प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। युनिकोड़ एक ऐसी तकनीक है जो कम्प्युटर द्वारा फाइलों के आदान प्रदान में काम आती है। युनिकोड़ की सहायता से कम्प्यूटर पर हिन्दी में टाइप जानने वाला तो काम कर ही सकता है। साथ ही, जो लोग कम्प्यूटर पर हिन्दी में काम करना चाहते हैं और कर नहीं पाते हैं, वे भी बिना विशेष प्रयत्न किए कम्पूटर पर हिन्दी में काम कर सकते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केन्द्र के तकनीकी अधिकारी एवं आई. टी. प्रोफेशनल श्री मंजीत सिंह ने प्रतिभागियों को युनिकोड़ पर विस्तृत जानकारी दी। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में जोधपुर नगर के 9 विभिन्न कार्यालयों के 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
4. राजभाषा व्याख्यानमालाओं का आयोजन
वैज्ञानिक तथ्यों को राजभाषा के माध्यम से जन-साधारण तक पहुँचाने के लिए यह केन्द्र निरन्तर प्रसरा कर रहा है। इन्हीं प्रयासों के अंतर्गत केन्द्र में 'डीएमआरसी राजभाषा व्याख्यानमाला' का आयोजन किया जाता है जिसमें देश के मूर्धन्य वैज्ञानिक राजभाषा में जनोपयोगी तथ्यों को प्रस्तुत करते हैं।

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29 मार्च, 2007 |
2 मई, 2008 |
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14 सितम्बर, 2009 |
25 मार्च, 2010 |
5. अखिल भारतीय हिन्दी प्रतियोगिताएं
केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद, नई दिल्ली ने केन्द्र को प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन की मान्यता दी। इसके अंतर्गत 37वीं अखिल भारतीय हिन्दी निबंध प्रतियोगिता व 37वीं अखिल भारतीय हिन्दी टिप्पण एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

केन्द्रीय सचिवालय, दिल्ली - अप्रैल, 2005
6. राजभाषा सम्मेलनों में प्रतिभागिता
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के महानिदेशक व केन्द्र की निदेशक प्रभारी राजभाषा संबंधी विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान देते हुए राजभाषा गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं और अपने कर्मचारियों को राजभाषा सम्मेलनों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इस संबंध में लगातार पिछले तीन वर्षों से इस केन्द्र ने देश के विभिन्न भागों में आयोजित कई राजभाषा सम्मेलनों में अपनी प्रतिभागिता दर्ज की है जिनमें से भारतीय राजभाषा परिषद् द्वारा दिनांक 27-29 दिसम्बर, 2008 में हैदराबाद सम्मेलन, दिनांक 9-11 दिसम्बर, 2009 में पुरी सम्मेलन तथा दिनांक 21 जनवरी, 2011 को राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित गोआ सम्मेलन सम्मिलित हैं।

7. विभिन्न वैज्ञानिक कार्यों में हिन्दी का प्रयोग
केन्द्र में सभी प्रकार के फार्म हिन्दी या द्विभाषी रूप में प्रयोग किए जा रहे हैं, साथ ही केन्द्र में चल रही विभिन्न अनुसंधानिक परियोजनाओं में प्रयुक्त प्रश्नावलियों/पोस्टर आदि का प्रयोग भी हिन्दी में किया जा रहा है। इसके अलावा इन परियोजनाओं के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों में हिन्दी भाषा के प्रयोग को प्राथमिकता दी जाती है। इनमें से कुछ वैज्ञानिक कार्यक्रमों की एक झलक :
(क) पुनश्चर्या प्रशिक्षण पाठयक्रम

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फरवरी-मार्च, 2006 |
जनवरी-फरवरी, 2007 |
मार्च – अप्रैल, 2008 |
(ख) रयूमेटिक ज्वर व रयूमेटिक हृदय रोग पर कार्यशालाएं
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वर्ष 2008 |
वर्ष 2009 |
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